ऐतिहासिक घटनाएँ

     
  • 1937 में त्रिपुरा के अंतिम महाराजा बीर बिक्रमकिशोर माणिक्य ने "विद्यापत्तन योजना" के अंतर्गत एक कॉलेज की स्थापना की योजना बनाई थी।
  • 7 मई, 1937 को महाराजा बीर बिक्रम ने "विद्यापत्तन योजना" के अंतर्गत राज्य के पहले महाविद्यालय महाराजा बीर बिक्रम महाविद्यालय(एमबीबी) की आधारशिला रखी।
  • 1947 में कलकत्ता विश्वविद्यालय के अंतर्गत निजी पहल पर 1950 में कैलाशहर में रामकृष्ण महाविद्यालय और 1964 में बेलोनिया में बेलोनिया महाविद्यालय और 1967 में अगरतला में रामठाकुर महाविद्यालय ने काम करना शुरू किया।
  • 1982 में त्रिपुरा के तीन निजी उपाधि महाविद्यालयों को राज्य सरकार अधिग्रहीत कर लिया।
  • 1976 में त्रिपुरा राज्य को यूजीसी द्वारा कलकत्ता विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर स्कंध, कलकत्ता विश्वविद्यालय पोस्ट ग्रेजुएट सेंटर (सीयूपीजीसी) के नाम से मंजूरी दी गई थी।
  • 18 दिसंबर 1985 को ऐतिहासिक जनशिक्षा (पीपुल्स एजुकेशन) आंदोलन के महान नेता और- तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सह शिक्षा मंत्री, त्रिपुरा सरकार श्री दशरथ देब द्वारा 18 दिसंबर, 1985 को भावी विश्वविद्यालय हेतु सूर्यमणिनगर परिसर की आधारशिला रखी गई थी ।
  • 2 अक्टूबर, 1987 में स्थापित विश्वविद्यालय, त्रिपुरा विश्वविद्यालय को संसद द्वारा अधिनियमित त्रिपुरा विश्वविद्यालय अधिनियम, 2006 के द्वारा 2 जुलाई, 2007 से केंद्रीय विश्वविद्यालय में परिवर्तित कर दिया गया।

 

 

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अंतिम अद्यतनीकरण : 28/11/2022 02:03:00

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